दिल रोया ना आंखें बरसीं ,तुम आये ना सांसें ठहरीं।
ख्वाबों पर भी तेरा बस है , तनहाई में तू ही दिखती।
मिल जाये जो दीद तुम्हारी ,कल ईद हमारी भी मनती।
मजबूत सफ़ीना है तेरा , जर्जर सी है मेरी कश्ती ।
मन्ज़ूर मुझे डूबना लेकिन , दिल की नदियां है कहां गहरी।
सब्र चराग़ों सा रखता मैं , ज़ुल्मी हवायें तुमसे डरतीं ।
अर्श सियासत की छोड़ न तू , मर जायेगी जनता प्यासी ।
वादा तूने तोडा है पर , तुहमत में है मेरी बस्ती ।
तेरा घर मेरा मंदिर है , मेरी जान वहीं है अटकी।
रथ के दो पहिये हम दोनों , तू ही हरदम आगे चलती।
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गुरुवार, 17 जून 2010
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